महाकाल की नगरी के वे पावन धाम, जिनके दर्शन बिना उज्जैन यात्रा अधूरी मानी जाती है।

बारह ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग। प्रतिदिन प्रातः होने वाली भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है।

काल भैरव को उज्जैन का नगर कोतवाल माना जाता है। मान्यता है कि महाकाल के दर्शन के बाद काल भैरव के दर्शन से यात्रा पूर्ण होती है।

महाकाल मंदिर के निकट स्थित यह शक्तिपीठ राजा विक्रमादित्य की आराध्य देवी का मंदिर माना जाता है।

उज्जैन का प्राचीन गणेश मंदिर, जहाँ भक्त चिंताओं से मुक्ति की कामना लेकर आते हैं।

मान्यता है कि यह मंगल ग्रह की जन्मभूमि है। मंगल दोष निवारण के लिए यहाँ भात पूजा कराई जाती है।

त्रिवेणी घाट पर स्थित यह मंदिर शनि देव और नवग्रहों को समर्पित है। शनिश्चरी अमावस्या पर यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
"समय हो तो इन स्थलों के दर्शन भी अवश्य करें।"
AC कार और स्थानीय मार्गदर्शन के साथ — परिवार के लिए आरामदायक यात्रा।
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