प्राचीन अवंतिका नगरी — महाकाल, शिप्रा और सनातन परंपरा की धरती। यात्रा की पूरी जानकारी एक ही जगह।
"सप्त पुरियों में से एक, बारह ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणमुखी महाकाल की नगरी।"
मध्य प्रदेश में शिप्रा नदी के तट पर बसा उज्जैन भारत के सबसे प्राचीन नगरों में से एक है। इसे अवंतिका, उज्जयिनी और महाकाल की नगरी के नाम से जाना जाता है। यह मोक्षदायिनी सप्त पुरियों में से एक है और हर 12 वर्ष में यहाँ सिंहस्थ कुंभ का आयोजन होता है।
राजा विक्रमादित्य की राजधानी और महाकवि कालिदास की कर्मभूमि रहा उज्जैन, खगोल विज्ञान का भी प्राचीन केंद्र रहा है — कर्क रेखा इसी क्षेत्र से होकर गुज़रती है और यहाँ की वेधशाला (जंतर मंतर) आज भी देखी जा सकती है।
"रेल, सड़क और हवाई मार्ग — तीनों से उज्जैन आसानी से जुड़ा है।"
उज्जैन जंक्शन देश के प्रमुख शहरों — दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, भोपाल, इंदौर — से सीधी ट्रेनों द्वारा जुड़ा है। स्टेशन से महाकाल मंदिर कुछ ही किलोमीटर दूर है।
इंदौर, भोपाल, देवास और अहमदाबाद से नियमित बसें और टैक्सी उपलब्ध हैं। इंदौर से उज्जैन लगभग 55 किमी है।
निकटतम हवाई अड्डा इंदौर का देवी अहिल्याबाई होल्कर एयरपोर्ट है, जहाँ से टैक्सी द्वारा लगभग डेढ़ घंटे में उज्जैन पहुँचा जा सकता है।
"मौसम और पर्व के अनुसार अपनी यात्रा की योजना बनाइए।"
घूमने का सबसे अच्छा समय। मौसम सुहावना रहता है और दर्शन आराम से होते हैं।
महाकाल की सवारी और विशेष उत्सव — अद्भुत अनुभव, पर भारी भीड़। होटल और भस्म आरती पहले से बुक करें।
दिन में तेज़ गर्मी रहती है। सुबह-शाम दर्शन की योजना बनाएँ और पानी साथ रखें।
"मंदिरों के साथ उज्जैन के ये स्थल भी अवश्य देखें।"
शिव कथाओं की भव्य प्रतिमाओं वाला कॉरिडोर — शाम की रोशनी में सबसे सुंदर।
शिप्रा तट का प्रमुख घाट — स्नान और संध्या आरती के लिए प्रसिद्ध।
राजा जयसिंह द्वारा बनवाई गई प्राचीन खगोलीय वेधशाला।
मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने यहीं शिक्षा प्राप्त की।
शिप्रा नदी के बीच द्वीप पर बना ऐतिहासिक महल।
राजा भर्तृहरि की तपस्थली मानी जाने वाली प्राचीन गुफाएँ।
"छोटी-छोटी बातें जो आपकी यात्रा को आसान बनाएँगी।"
कार, होटल, दर्शन और पूजा — सब कुछ हम सँभालेंगे।
दर्शन, भस्म आरती, होटल या पूजा — अपनी जानकारी भेजें, हमारी टीम जल्द संपर्क करेगी।